कर्नल पुरोहित कौन हैं? मालेगांव धमाके में उनका नाम कैसे जुड़ा और आज कहाँ हैं?

कर्नल पुरोहित: एक ऐसा नाम जिसने मालेगांव को हिला दिया… पर असलियत क्या है?

दोस्तों, आज बात करते हैं एक ऐसे शख्स की जिसका नाम सुनते ही मालेगांव धमाके की याद ताजा हो जाती है – लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित, यानी कर्नल पुरोहित। पर सच क्या है? 2008 में हुए उस भीषण धमाके में जहां 6 लोगों की जान चली गई और 100 से ज्यादा घायल हुए, उस मामले में पुरोहित का नाम कैसे सामने आया? और आज वो कहाँ हैं? चलिए, पूरी कहानी समझते हैं।

एक तरफ तो ये कहानी एक बहादुर Army officer की है, तो दूसरी तरफ… एक ऐसा आरोप जिसने उनकी ज़िंदगी ही बदल दी। 9 साल जेल में बिताने के बाद 2017 में Supreme Court ने उन्हें जमानत दी। और फिर? NIA की special court ने भी कहा – “भई, कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले।” और इस तरह वो बरी हो गए। पर क्या सच में इतना सरल था ये केस?

असल में, शुरुआत में तो ये केस ‘Hindu terrorism’ से जोड़कर देखा गया। पुरोहित पर आरोप था कि वो किसी हिंदू आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा थे। सच कहूँ तो, यहीं से शुरू हुई थी पूरी राजनीतिक आंधी। 2008 में ही उनकी गिरफ्तारी हुई, और Army Act के तहत भी केस चला। पर सवाल ये है – क्या सच में वो guilty थे?

2017 में Supreme Court ने तो एक तरह से उन्हें राहत दी ही, लेकिन असली मोड़ तब आया जब NIA की जांच में भी कुछ खास नहीं मिला। देखा जाए तो ये पूरा मामला एक पहेली बनकर रह गया। कुछ लोग इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताते हैं, तो कुछ का कहना है कि सच अभी भी सामने नहीं आया।

अब सवाल ये उठता है – कर्नल साहब खुद क्या कहते हैं? उनका दावा है कि उन्हें जानबूझकर फंसाया गया। और सुनिए, उन्हें सेना के कई अधिकारियों का भी पूरा समर्थन मिला। BJP और Congress की बहस तो अलग ही चल पड़ी – एक ने साजिश का आरोप लगाया, तो दूसरे ने इनकार कर दिया। राजनीति, है न?

तो अब क्या? कानूनी तौर पर तो पुरोहित बरी हो चुके हैं, पर कुछ लोग अभी भी लड़ रहे हैं। और हाँ, ‘Hindu terrorism’ वाली बहस फिर से गरमा गई है। खुद पुरोहित अब social और political platforms पर एक्टिव हैं – अपनी कहानी खुद बता रहे हैं।

अंत में बस इतना – मालेगांव केस सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि ऐसा पहेली है जिसने हमारी सुरक्षा व्यवस्था, आतंकवाद की परिभाषा और राजनीति पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। Court ने फैसला दे दिया, पर जनता का दिल अभी भी सवालों से भरा है। क्या आपको नहीं लगता?

कर्नल पुरोहित का मामला… अरे भाई, क्या कहूँ, सच में एक ऐसा पेचीदा केस है जिसमें आज भी पानी की जगह तेल डाला जा रहा है। मालेगांव ब्लास्ट? वो तो बस शुरुआत थी। असल में देखा जाए तो ये कहानी उस मिट्टी की तरह है जिसमें जितना खोदो, उतने ही नए सवाल निकल आते हैं। BBC और कुछ दूसरे भरोसेमंद sources की रिपोर्ट्स पढ़कर तो यही लगता है कि अभी तक सच्चाई का सूरज पूरी तरह नहीं निकला।

लेकिन सोचने वाली बात ये है – कैसे एक इंसान का नाम ऐसे बड़े घटनाक्रम से जुड़ जाता है? और फिर…? सच कहूँ तो ये वो सवाल है जिसका जवाब ढूंढ़ने में अभी वक्त लगेगा। जैसे कोई पहेली हो जिसके टुकड़े अलग-अलग जगह बिखरे हों।

और हाँ, इस सबके बीच सबसे दिलचस्प बात? जब तक पूरी तस्वीर सामने न आए, तब तक हर theory सिर्फ एक guess है। है न?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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