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युवक गणेश कौन था? 11 दिन बाद संस्कार और जेल में 3 महीने की कैद की पूरी कहानी

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युवक गणेश कौन था? 11 दिन की अस्पताल यात्रा और जेल के 3 महीने की कहानी

हरियाणा के हिसार से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। गणेश नाम के एक युवक की मौत… और वह भी एक डीजे विवाद के बाद? सच कहूं तो ये केस सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि पुलिस-प्रशासन और आम जनता के बीच बढ़ते अविश्वास की कहानी बयां करता है। एडीजीपी केके राव ने तो पुलिस की तरफ से सफाई दे दी है – “कोई लापरवाही नहीं हुई”। लेकिन सवाल यह है कि फिर गणेश के परिवार वाले और स्थानीय लोग पुलिस पर मारपीट का आरोप क्यों लगा रहे हैं? और तो और, पता चला कि गणेश पर पहले से एक केस चल रहा था – जेल की 3 महीने की सजा भी काट चुका था। मौत से पहले वो 11 दिन अस्पताल में संघर्ष करता रहा… और फिर सब खत्म।

कहानी की शुरुआत: कैसे भड़का विवाद?

गणेश कोई बड़ा गुंडा नहीं था, बस हिसार का एक आम लड़का था। हां, एक आपराधिक मामला जरूर चल रहा था। पर ये डीजे वाली घटना तो अलग ही कहानी है! पुलिस ने हिरासत में लिया, और फिर क्या? लड़के की हालत बिगड़ने लगी। परिवार वालों का दावा है – “पीट-पीट कर अधमरा कर दिया”। अस्पताल में 11 दिन तक जिंदगी और मौत की जंग… और अंत में हार। स्थानीय लोगों का गुस्सा तो समझ आता है – पुलिस पर लापरवाही के आरोप, न्याय की मांग। पर सच क्या है? ये तो जांच ही बताएगी।

एडीजीपी का स्टैंड: “हम बिल्कुल सही थे”

एडीजीपी केके राव ने तो साफ कह दिया – “पुलिस ने कोई गलती नहीं की, सब नियमों के मुताबिक किया”। भविष्य में और सख्ती का वादा भी कर दिया। लेकिन यहां दिक्कत ये है कि गणेश का परिवार इस बयान को मानने को तैयार ही नहीं। उनका सवाल सीधा है – “तो फिर हमारा बेटा मरा कैसे?” जांच चल रही है, प्रशासन नजर बनाए हुए है… पर क्या ये नजरें सच देख पाएंगी?

किसने क्या कहा? – समाज की आवाज

इस मामले ने सबको बोलने पर मजबूर कर दिया। एक तरफ एडीजीपी का दावा – “सब प्रोटोकॉल फॉलो किया”। दूसरी तरफ परिवार का रोना – “पुलिस की मारपीट ने ली जान”। स्थानीय नेताओं ने भी मौका नहीं गंवाया – “निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को फांसी मिले!” असल में, ये सब बयानबाजी एक दर्द भरी कहानी को और उलझा रही है।

आगे का रास्ता: न्याय या सियासत?

अब सबकी नजरें जांच पर टिकी हैं। नतीजे क्या कहेंगे? अगर पुलिस की गलती साबित हुई तो… वैसे हम सब जानते हैं कि ऐसे मामलों में क्या होता है। नए गाइडलाइन्स का ऐलान, कुछ सस्पेंशन, शायद कुछ ट्रांसफर। पर गणेश के परिवार को क्या मिलेगा? सामाजिक संगठन भी मैदान में उतर सकते हैं। पर सच तो यह है कि एक मां ने अपना बेटा खो दिया है – और कोर्ट के आदेश से दर्द कम नहीं होता।

अंत में: ये केस सिर्फ गणेश की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल है जहां आम आदमी को न्याय मिलने में उम्रें लग जाती हैं। जांच के नतीजे चाहे जो भी हों, एक सच ये भी है कि हिसार का एक परिवार आज बेटे के बिना है। और समाज? वो तो बस अगले स्कैंडल का इंतज़ार कर रहा है…

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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