ट्रंप का गुस्सा फिर भड़का! भारत पर 25% टैरिफ की मार… पर असली वजह क्या है?
अरे भई, ट्रंप साहब फिर से अपने मूड में आ गए लगते हैं! अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने अचानक भारत के स्टील, एल्युमीनियम और कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स पर 25% टैरिफ लगा दिया है। सच कहूं तो ये कोई नई बात नहीं – ट्रंप और उनके ‘अचानक के फैसले’ तो जैसे पैकेज डील की तरह आते हैं। लेकिन सवाल यह है कि अभी? इसी वक्त? जब दोनों देशों के बीच वार्ताएं चल रही थीं?
वाइट हाउस का कहना है कि ये कदम अमेरिकी बिजनेस को भारतीय सब्सिडी से बचाने के लिए था। पर भई साहब, क्या सच में इतना सरल है ये समीकरण? चलो, थोड़ा और गहराई से देखते हैं…
पीछे का सच: ये तनाव नया नहीं, पुराना है
देखिए, भारत और अमेरिका का ये झगड़ा कोई आज कल की बात नहीं। ये तो वैसा ही है जैसे आपके रिश्तेदारों वाला पुराना टीवी सेट – चलता तो है, पर बीच-बीच में शॉर्ट सर्किट हो जाता है!
पिछले कुछ सालों से डिजिटल टैक्स को लेकर, फिर स्टील-एल्युमीनियम को लेकर तकरार चल रही थी। ट्रंप तो पहले भी धमकी दे चुके थे। और हां, भारत ने भी कुछ अमेरिकी सामानों पर जवाबी टैरिफ लगाए थे – जिसे ट्रंप ने ‘अनफेयर’ बताया था। तो ये नया ड्रामा सरप्राइज नहीं, बल्कि उसी सीरीज का नया एपिसोड लगता है!
अब ताजा क्या हुआ?
अब इस नए फैसले ने तो हमारे निर्यातकों की नींद हराम कर दी है। वाइट हाउस का कहना है कि ये सब्सिडी पाने वाले भारतीय उद्योगों को टारगेट कर रहा है। भारत सरकार ने ‘निराशा’ जताई है – जो कि सरकारी भाषा में ‘हम बहुत गुस्से में हैं’ कहने का तरीका होता है!
एक्सपर्ट्स की मानें तो ये सीधा वार है हमारी प्रतिस्पर्धा क्षमता पर। सोचिए, अगर आपका दाम 25% बढ़ जाए तो कोई खरीदेगा? बिल्कुल नहीं!
किसको क्या लगा? प्रतिक्रियाओं का दंगल
इस फैसले ने तो दोनों तरफ आग लगा दी। हमारे विदेश मंत्रालय ने इसे ‘एकतरफा’ बताया – मतलब ‘बिना पूछे की गई शरारत’। मजे की बात ये कि अमेरिकी बिजनेस ग्रुप्स भी खफा हैं! क्यों? क्योंकि टैरिफ का असर तो अंत में अमेरिकी ग्राहकों पर ही पड़ेगा। महंगाई बढ़ेगी, तो किसको अच्छा लगेगा?
राजनीति की नजर से देखें तो लगता है ट्रंप 2024 के चुनाव से पहले अपने ‘America First’ वाले राग को और जोर से गा रहे हैं। वोट बैंक का खेल, आप समझ ही गए होंगे!
अब आगे क्या? कुछ अंदाजा?
तो अब बड़ा सवाल – अब क्या होगा? भारत के पास कुछ रास्ते हैं:
- WTO में शिकायत कर सकते हैं (जहां केस सालों चलता है!)
- जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं (जैसे ‘तुमने मारा तो हम भी मारेंगे’ वाला सीन)
- या फिर बातचीत से हल निकाल सकते हैं
पर एक डर ये भी है कि अगर ये झगड़ा बढ़ा तो हमारी डिफेंस और टेक डील्स पर भी असर पड़ सकता है। और ये तो हम सब नहीं चाहेंगे, है न?
अंत में बस इतना – ये टैरिफ वाली लड़ाई सिर्फ दो देशों की नहीं, पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सिरदर्द बन सकती है। अगले कुछ हफ्ते बताएंगे कि ये नाटक किस दिशा में जाता है। पर फिलहाल तो यही लग रहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का ये सीरियल और भी मसालेदार होने वाला है!
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असल में, ट्रंप का यह फैसला सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं है। बात कुछ और ही है। यह उनकी ‘America First’ नीति का असर है, और साथ ही भारत के साथ Trade imbalance को लेकर उनकी बढ़ती झुंझलाहट भी। अब सवाल यह है कि क्या यह फैसला दोनों देशों के Trade relations को हमेशा के लिए बदल देगा? शायद।
लेकिन मज़ेदार बात यह है कि अब सारी नज़रें भारत सरकार पर टिकी हैं। वे इस चुनौती का जवाब कैसे देंगे? Diplomatic talks से हल निकलेगा या फिर यह एक लंबी खींचतान का मुद्दा बन जाएगा? सच कहूं तो, अभी कुछ भी कहना मुश्किल है। पर एक बात तय है – यह मामला आसान नहीं होने वाला।
ट्रंप का झुंझलाहट! भारत पर 25% टैरिफ बम – जानिए पूरा माजरा
अरे भाई, ट्रंप साहब फिर से सुर्खियों में हैं! इस बार उनका निशाना बना हमारा भारत। पर सवाल यह है कि आखिर यह टैरिफ वाला ड्रामा क्या है? चलिए, बिना लाग-लपेट के समझते हैं।
1. अचानक ट्रंप को भारत पर 25% टैरिफ लगाने की क्या पड़ी?
देखिए, Trump साहब का मानना है कि भारत ने US products के साथ ‘साफ-सुथरा’ व्यापार नहीं किया। मतलब यह कि उन्हें लगता है हमने अमेरिका को trade deficit में धकेल दिया है। पर सच क्या है? एक तरफ तो यह सच है कि भारत का export ज्यादा है, लेकिन क्या यह टैरिफ लगाने का सही तरीका है? ईमानदारी से कहूं तो मुझे तो यह ज्यादती लगती है।
2. क्या यह टैरिफ सिर्फ हमारे देश के लिए है?
अरे नहीं भई! Trump तो अपने इस तरीके के लिए मशहूर हो चुके हैं। China और EU को तो वह पहले ही निशाना बना चुके हैं। पर भारत के मामले में बात थोड़ी अलग है – यहां सीधा trade imbalance का मुद्दा है। है न मजेदार बात?
3. इसका हमारी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
Short term में तो झटका लगेगा ही, खासकर steel और aluminum जैसे सेक्टर्स को। पर भारत है कहां मानने वाला! Long term में हम दूसरे markets तलाश लेंगे। याद रखिए, हम वही देश हैं जिसने 1991 के संकट के बाद नई राह बनाई थी। एकदम ज़बरदस्त। सच में।
4. भारत ने क्या कार्रवाई की है?
अरे हां! हमारी सरकार ने WTO में शिकायत दर्ज करवाई है और अमेरिकी products पर जवाबी टैरिफ भी लगाए हैं। अब देखना यह है कि कहीं यह trade war तो नहीं बन जाएगा? पर एक बात तो तय है – भारत अब वह पुराना देश नहीं जो चुपचाप सब कुछ सह ले।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com