खाने का लेबल पढ़ना क्यों ज़रूरी है? सच बताऊं, 90% लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं!
आजकल तो supermarket की shelves देखो – चिप्स, नूडल्स, ready-to-eat meals… सब कुछ इतने चमकदार पैकिंग में कि मन करता है बस उठा लो और खरीद लो। पर यहाँ धोखा हो जाता है, दोस्तों! क्या आपने कभी गौर किया कि इनके food labels पर क्या लिखा होता है? मेरा विश्वास करो, ज़्यादातर लोग तो बिना देखे ही सामान उठा लेते हैं। और यही आदत हमें धीरे-धीरे मोटापा, diabetes और heart disease की तरफ धकेल रही है। सोचिए, क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो लेबल पढ़ने को बेकार समझते हैं? अगर हाँ, तो यह पोस्ट आपके लिए ही है!
अरे भई, लेबल न पढ़ने से क्या-क्या हो सकता है?
सीधा सा तरीका समझाऊं – बिना लेबल पढ़े packed food खरीदना वैसा ही है जैसे आँख बंद करके गाड़ी चलाना! कुछ products में sugar की मात्रा तो इतनी ज़्यादा होती है कि सुनकर दाँत दुखने लगें। और नमक? उसे तो अलग-अलग नामों से छुपाया जाता है। असल में, एक छोटा सा पैकेट भी दो servings का हो सकता है – मतलब आप सोच रहे हैं कि थोड़ा खा रहे हैं, पर असल में double calories ले रहे हैं। बिल्कुल धोखा, है न?
और तो और, कुछ चीज़ों में तो ऐसे chemicals मिले होते हैं जिनके नाम तक हम नहीं बोल पाते। Sodium benzoate, monosodium glutamate (MSG)… ये सब हमारे digestion को खराब करने के लिए काफी हैं। मेरा एक दोस्त तो इन्हीं की वजह से हमेशा acidity से परेशान रहता था। तो सवाल यह है कि क्या हमें सच में इन चीज़ों की ज़रूरत है?
लेबल पढ़ने का सही तरीका – आसान भाषा में
तो अब बात करते हैं कि इन लेबल्स को कैसे समझें। पहली चाल – ingredients list पर नज़र डालें। जो चीज़ सबसे पहले लिखी होती है, वही product में सबसे ज़्यादा होती है। अगर sugar, palm oil या maida टॉप पर है तो समझ जाइए कि यह healthy नहीं है।
दूसरा काम – nutrition facts देखें। पर यहाँ एक चीज़ ध्यान रखें – per serving और per 100g में फर्क होता है। मेरा personal rule: अगर किसी चीज़ में daily value का 20% से ज़्यादा sugar या sodium है तो मैं उसे छोड़ देता हूँ। और हाँ, sugar के अलग-अलग नामों से मत घबराइए – corn syrup, dextrose… ये सब चीनी ही तो हैं!
क्या खाएं और क्या नहीं? मेरी personal choices
असल में बात बहुत सीधी है – जितना हो सके natural चीज़ें खाएं। मेरा मतलब – ताज़े फल, हरी सब्ज़ियाँ, दालें… ये सब तो हमारी दादी-नानी भी खाती थीं न? पर आजकल हमें जल्दीबाज़ी में ready-to-eat चीज़ें अच्छी लगने लगी हैं।
मेरा एक छोटा सा तरीका – अगर किसी product में 5 से ज़्यादा ingredients हैं या ऐसे नाम हैं जिन्हें आप नहीं समझ पा रहे, तो उसे वापस shelf पर रख दें। और हाँ, “diet” या “sugar-free” लिखा हो तो भी सावधान! कई बार इनमें और भी harmful चीज़ें मिली होती हैं।
डॉक्टर के पास कब जाएँ?
अगर आपको लगातार acidity, skin problems या बिना वजह थकान महसूस हो रही है तो हो सकता है आपके खाने में कुछ गड़बड़ हो। मैंने तो अपने एक दोस्त को कहा था – भई, तुम्हारी यह allergy तो शायद packaged food से ही हो रही है! और सचमुच, जब उसने processed food कम कर दिया तो सब ठीक हो गया।
अंत में बस इतना कहूँगा – food label पढ़ना कोई बहुत बड़ा काम नहीं है। बस shopping करते समय थोड़ा extra time दीजिए। वैसे भी, सेहत ही तो सबसे बड़ी दौलत है न? तो क्यों न इसकी देखभाल की जाए? अगली बार supermarket जाएँ तो पैकेट का पीछे वाला हिस्सा ज़रूर पढ़ें – यह small habit आपकी life बदल सकती है!
अगली बार जब भी कोई पैकेट्ड फूड उठाएं, तो एक पल रुकिए और लेबल को गौर से देखिए। ये छोटी सी आदत आपको कितनी बड़ी मुसीबत से बचा सकती है, है न? मतलब, आप जानते हैं कि इनमें कितने harmful ingredients, excess sugar और unhealthy fats छुपे होते हैं? लेकिन सच्चाई ये है कि 90% लोग तो बिना पढ़े ही खरीद लेते हैं – survey भी यही कहता है।
अब सोचिए, अगर आपको पता चले कि ये छोटी सी चीज़ आपकी health के लिए कितनी बड़ी game-changer साबित हो सकती है… तो फिर क्यों न इसकी शुरुआत आज से ही करें? थोड़ी सी सावधानी आपको long-term diseases से बचा सकती है। सच कहूं तो, ये उतना ही ज़रूरी है जितना कि बाइक चलाते वक्त हेलमेट पहनना।
तो क्या कहते हैं? Smart shopping की आदत डालने का यही सही वक्त है। एकदम सीधी सी बात!
Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com