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“US भारत को ही क्यों निशाना बना रहा? यूरोपीय संघ और तुर्की के रूसी तेल डील पर चुप्पी!”

US भारत को ही क्यों निशाना बना रहा है? यूरोप और तुर्की को छूट देकर अमेरिका क्या साबित करना चाहता है?

अभी-अभी एक बड़ी खबर आई है – अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल आयात पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। सच कहूं तो, यह कोई नई बात नहीं। लेकिन हैरानी की बात ये है कि यूरोपीय देश और तुर्की तो रूस से खुलकर तेल खरीद रहे हैं, पर उन पर कोई एक्शन नहीं! क्या ये साफ-साफ पक्षपात नहीं है? मौलाना सैयद काब रशीदी जैसे लोगों ने तो इस पर सीधे-सीधे अमेरिका को घेर ही लिया है।

पूरा माजरा क्या है? यूक्रेन वॉर से जुड़ी है कहानी

असल में बात यूक्रेन वॉर से शुरू होती है। जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंधों की बौछार कर दी। तेल पर भी बैन लगा दिया। लेकिन भारत ने क्या किया? अपने हित देखे। सस्ता तेल मिल रहा था, तो खरीदा। और अब इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।

मजे की बात ये है कि यूरोप तो अभी भी रूसी तेल खरीद रहा है! तुर्की भी। पर उन पर कोई एक्शन नहीं। साफ दिख रहा है न दोहरा रवैया? अमेरिका का ये तरीका वाकई सवाल खड़े करता है।

50% टैरिफ वाली धमकी – भारत ने कैसे लिया?

अब स्थिति और गंभीर हो गई है। अमेरिका ने सीधे 50% टैरिफ की बात कही है। भारत सरकार ने इसे “साफ-साफ भेदभाव” बताया है। और सही भी किया। हमारी सरकार ने स्पष्ट किया है – ऊर्जा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।

मौलाना सैयद काब रशीदी ने तो बिल्कुल सही कहा – “अमेरिका भारत की आजादी पर सवाल उठा रहा है।” सचमुच, सवाल ये है कि यूरोप और तुर्की को छूट क्यों? सिर्फ भारत ही क्यों निशाने पर?

किसने क्या कहा? प्रतिक्रियाओं का दौर

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी बात रखी है – “हम अपने फायदे के हिसाब से फैसले लेंगे।” सीधी और स्पष्ट बात। मौलाना साहब ने अमेरिका के इस रवैये को गलत बताया है। और सही भी किया।

वहीं अमेरिकी प्रतिनिधि की बात सुनिए – “हमें उम्मीद है भारत हमारे नियम मानेगा।” यानी सीधा दबाव बनाने की कोशिश। क्या ये सही है? मुझे तो नहीं लगता।

आगे क्या होगा? भविष्य के अनुमान

अगर अमेरिका ने सच में ये टैरिफ लगा दिया, तो भारत-अमेरिका रिश्तों पर बुरा असर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि भारत रूस और मिडिल ईस्ट के साथ और ज्यादा डील कर सकता है। जोकि हमारे लिए फायदे का सौदा होगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की झूठी नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं। कई देश अब खुलकर बोल रहे हैं। अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। और ये अच्छा संकेत है।

आखिरी बात

ये सिर्फ तेल या टैरिफ की बात नहीं है। ये भारत की आजादी और अमेरिकी दादागिरी के बीच की लड़ाई है। आने वाले दिनों में ये विवाद और बढ़ सकता है। भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए मजबूत कदम उठाने होंगे। और हमें पूरा विश्वास है कि हमारी सरकार ऐसा करेगी भी।

क्या आपको नहीं लगता कि अमेरिका का ये रवैया गलत है? कमेंट में बताइए आपका क्या ख्याल है।

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US भारत को ही क्यों निशाना बना रहा? – कुछ सवाल जो दिमाग खाए जा रहे हैं

1. अच्छा, ये बताओ – Russia से तेल खरीदने पर US की नाराज़गी सिर्फ भारत के साथ ही क्यों?

देखिए, US का तर्क तो यही है कि हमने sanctions को कमज़ोर किया। मगर सच्चाई? यूरोप तो रोज़ Russia से तेल ले रहा है! फिर भी उनके लिए कोई strict guidelines नहीं। साफ-साफ double standard नहीं तो और क्या? ऐसा लगता है जैसे हमारी चाय में नींबू निचोड़ दिया गया हो!

2. EU और तुर्की भी तो Russia से डील कर रहे हैं, फिर US का selective outrage?

असल में बात ये है कि US के लिए EU और तुर्की ‘too big to fail’ वाली कैटेगरी में आते हैं। उनके साथ trade, politics – सब कुछ इतना गुंथा हुआ है कि openly बोलने का रिस्क नहीं ले सकते। वहीं हमारे साथ? थोड़ा सख्त रुख। शायद इसलिए कि वो चाहते हैं हम पूरी तरह West के साथ खड़े हों। पर सवाल ये है – क्या हमारे अपने हितों का कोई मोल नहीं?

3. सुनो, क्या सच में Russia से तेल लेना भारत की गलती है?

अरे भई नहीं यार! ऐसा कुछ नहीं। समझो जैसे बाज़ार में आम 50 रुपये किलो मिल रहा हो, और कोई 30 में दे रहा हो – तो आप कहाँ जाएँगे? बिल्कुल सही! भारत ने बस अपने लोगों के पैसे और पेट्रोल की कीमतों का ख्याल रखा है। Energy security की बात हो या inflation control – ये तो कोई भी समझदार देश करेगा। Political? बिल्कुल नहीं। Pure business वाली बात।

4. अब आगे क्या? भारत इस chess game में कैसे चलेगा?

देखिए, हमारी सरकार diplomacy के मैदान में काफी active है। US और दूसरे Western देशों को समझा रही है कि ये डील सबके फायदे की है। साथ ही future की सोच रही है – अरब देशों से, अफ्रीका से, कहीं से भी तेल के नए रास्ते खोलने पर काम चल रहा है। ताकि किसी एक पर निर्भरता न रहे। Smart move नहीं तो और क्या? थोड़ा टाइम लगेगा, पर दांव सही हैं।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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