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अलकायदा की ‘लेडी मास्टरमाइंड’ शमा प्रवीण कौन है? गुजरात ATS ने कैसे पकड़ा?

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अलकायदा की ‘लेडी मास्टरमाइंड’ शमा प्रवीण: गुजरात ATS ने कैसे पकड़ा ये खतरनाक शख्सियत?

सुनकर हैरानी होगी, लेकिन गुजरात ATS ने हाल में एक ऐसी शख्स को पकड़ा है जिसे ‘लेडी मास्टरमाइंड’ कहा जा रहा है। झारखंड की रहने वाली शमा प्रवीण को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया – और ये कोई आम अपराधी नहीं। अल-कायदा से जुड़ी होने के साथ-साथ, उस पर सोशल मीडिया के ज़रिए जिहादी प्रोपेगैंडा फैलाने के गंभीर आरोप हैं। असल में, ये केस इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि इसमें एक महिला को आतंकी नेटवर्क की ‘ब्रेन’ बताया जा रहा है। सोचिए, जो काम हम आमतौर पर पुरुषों से जोड़कर देखते हैं, वहीं एक औरत की अगुआई में चल रहा था!

अब थोड़ा शमा की बैकग्राउंड पर नज़र डालते हैं। झारखंड के एक छोटे से शहर से ताल्लुक रखने वाली ये औरत पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों की नज़र में थी। और सुनिए – उसका पति भी एक आतंकवादी था जिसे सुरक्षा बलों ने पहले ही ढेर कर दिया था। लेकिन कहते हैं न, बुराई कभी अकेली नहीं आती? पति के बाद शमा ने खुद ही अल-कायदा के एक मॉड्यूल में काम शुरू कर दिया। और उसका तरीका? सोशल मीडिया पर युवाओं को भड़काना और उन्हें रेडिकलाइज करना। Facebook, WhatsApp, Telegram – ये सब उसके लिए हथियार थे। है न हैरान कर देने वाली बात?

गिरफ्तारी की कहानी तो और भी मज़ेदार है। गुजरात ATS को किसी खुफिया सूत्र से पता चला कि ये ‘लेडी मास्टरमाइंड’ बेंगलुरु में छिपी हुई है। फिर क्या था – झारखंड और कर्नाटक पुलिस ने मिलकर एक साथ ऑपरेशन चलाया। और जो सामान बरामद हुआ, वो तो सच में डरावना था – कई डिजिटल डिवाइस और ढेर सारा जिहादी साहित्य! इनमें से कुछ तो सीधे-सीधे सोशल मीडिया पर प्रोपेगैंडा फैलाने के सबूत थे। सोचिए, आजकल आतंकवादी भी टेक्नोलॉजी का इतना अच्छा इस्तेमाल कर रहे हैं!

अब सवाल ये उठता है कि आगे क्या? शमा पर UAPA के तहत केस चलेगा, ये तो तय है। लेकिन असली चिंता की बात ये है कि महिलाएं अब आतंकवाद में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। पहले तो ये सब सुनने में भी अजीब लगता था, लेकिन अब ये हकीकत है। और सबसे बड़ी बात – सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल। क्या हम इस नए खतरे के लिए तैयार हैं? क्योंकि आज का आतंकवाद सिर्फ बंदूकों तक सीमित नहीं – वो हमारे मोबाइल्स और लैपटॉप्स तक पहुँच चुका है।

एक तरफ तो गुजरात ATS की ये बड़ी कामयाबी है। लेकिन दूसरी तरफ, ये केस हमें एक बड़ा सवाल छोड़ जाता है – क्या हमारी सुरक्षा एजेंसियां इस नए तरह के डिजिटल आतंकवाद से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं? क्योंकि जिस तरह से शमा जैसे लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो सच में डराने वाला है। आपको क्या लगता है?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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