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“बिहार के ‘जंगलराज’ का काला इतिहास: चंपा बिस्वास से शहाबुद्दीन तक आतंक की दास्ताँ!”

बिहार का ‘जंगलराज’ वापस आ रहा है? चंपा बिस्वास से शहाबुद्दीन तक… फिर वही डरावना सिलसिला!

अभी-अभी एक viral audio ने बिहार की राजनीति को हिला कर रख दिया है। सुनकर लगा जैसे 90s का वह डरावना दौर लौट आया हो। राजद विधायक भाई वीरेंद्र का वह ऑडियो सुनिए – जहां वे एक दलित पंचायत सचिव को “जूते से मारने” की धमकी दे रहे हैं। सच कहूं तो यह सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। क्या सच में बिहार उसी ‘लालू-राबड़ी युग’ में वापस जा रहा है? जब चंपा बिस्वास जैसे मामले सामने आते थे और शहाबुद्दीन जैसे लोग खुलेआम आतंक फैलाते थे?

वो दौर जब कानून था मजाक और गुंडे थे राजा

1990-2005… बिहार का वह काला अध्याय जिसे याद करके आज भी लोग कांप उठते हैं। मैंने अपने बड़े-बुजुर्गों से सुना है – उस समय तो सचमुच कानून नाम की कोई चीज नहीं थी। लालू जी के समय से लेकर राबड़ी देवी तक… सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया था। गुंडों की हिम्मत इतनी बढ़ गई थी कि वे थानों में बैठकर फैसले सुनाते थे! चंपा बिस्वास केस हो या शहाबुद्दीन का आतंक – हर तरफ बस अपराधियों का राज था। और अब यह नया ऑडियो… लगता है जैसे इतिहास खुद को दोहरा रहा है। सचिव ने तो यहां तक कह दिया कि उसे जान के लाले पड़ गए थे। सोचिए, एक सरकारी अधिकारी की यह हालत!

राजनीति गरमाई – कौन किसे पछाड़ेगा?

अब सवाल यह है कि इस मामले में आगे क्या होगा? राजद तो जैसे ‘मौन साध’ बैठी है। विधायक के खिलाफ कोई एक्शन नहीं। वहीं विपक्ष मानो जैसे मौके की ताक में था – भाजपा ने तो सीधे ‘जंगलराज’ का राग अलापना शुरू कर दिया। जदयू भी पीछे कहां रहने वाली थी! पुलिस वालों ने जांच शुरू तो कर दी, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं। राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि यह मामला बिहार में बड़ा उलटफेर कर सकता है। क्या सच में नीतीश कुमार इस आंधी को संभाल पाएंगे?

जाति का जहर और राजनीति का खेल

इस पूरे प्रकरण का सबसे दुखद पहलू? वह जातिगत नफरत जो एक बार फिर सामने आई। पीड़ित सचिव ने बताया कि उसे न सिर्फ मारने की धमकी मिली, बल्कि जाति के नाम पर गालियां भी सुननी पड़ीं। भाजपा वाले तो मानो मौके की तलाश में ही थे – “देखा आपने? लालू युग वापस आ गया!” राजद वाले बचाव में लगे हैं – “जांच चल रही है, अगर गलती निकली तो एक्शन लेंगे।” पर सच तो यह है कि यह घटना साबित करती है कि दलितों के साथ भेदभाव आज भी खत्म नहीं हुआ। कितने साल बीत गए, पर स्थिति वही की वही…

क्या हम फिर से उसी अंधेरे में जा रहे हैं?

तो अब बड़ा सवाल – क्या बिहार फिर से उसी डरावने दौर की तरफ बढ़ रहा है? मेरी नजर में तो यह पूरा मामला एक टेस्ट केस है। अगर राजद ने इस पर सख्ती नहीं दिखाई, तो समझ लीजिए गुंडों को संदेश चला जाएगा। विपक्ष तो मानो जैसे इस मौके का इंतजार ही कर रहा था। सरकार के लिए यह वाकई में एक बड़ी चुनौती है – एक तरफ अपने विधायक को बचाना है, दूसरी तरफ जनता का भरोसा। बिहार के लोगों की नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या नीतीश कुमार इस आंधी में नाव पार लगा पाएंगे? वक्त ही बताएगा…

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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