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“डॉग बाबू, ट्रैक्टर और अब डोनाल्ड ट्रंप! फर्जी आवेदनों से मची खलबली, जानें पूरा मामला”

डॉग बाबू, ट्रैक्टर और अब डोनाल्ड ट्रंप! फर्जी आवेदनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा

अब तो समस्तीपुर वाले भी शायद हंस-हंसकर कहने लगे होंगे – “अरे भई, इस बार कौन सा नाम लेकर आए हो?” सच कहूं तो बिहार के इस जिले का प्रशासन इन दिनों जिस मामले से जूझ रहा है, वह एक तरफ तो हंसाने वाला है, लेकिन दूसरी तरफ सिस्टम में गड़बड़ी की पोल खोल देता है। सोचिए, मोहिउद्दीन नगर के अंचल कार्यालय में कोई शख्स Donald Trump के नाम से आवास प्रमाण पत्र के लिए अर्जी डालकर चला गया! अब यह तो होना ही था कि अधिकारियों ने fake documents पकड़ लिए और आवेदन रद्द कर दिया। पर सवाल यह है कि ऐसे मामले लगातार क्यों सामने आ रहे हैं? खासकर तब, जब निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों की सफाई में जुटा हुआ है।

डॉग बाबू से ट्रंप तक – समस्तीपुर का ‘विचित्र आवेदनों का सफरनामा’

असल में देखा जाए तो यह कोई नई बात नहीं। समस्तीपुर तो जैसे अजीबोगरीब आवेदनों का हब बन चुका है। पहले कुत्ते का नाम सुनकर हंसी आई थी – हां भई, Dog Babu के नाम से अर्जी दाखिल हुई थी! फिर एक Tractor भी यहां का नागरिक बनने आ धमका था। मजे की बात यह कि इन सभी मामलों में जाली दस्तावेजों का ही सहारा लिया गया। जब निर्वाचन आयोग ने सूचियां साफ करने का अभियान शुरू किया था, तो सबको लगा था कि अब तो सुधार आएगा। लेकिन लगता है कुछ लोगों को system की कमजोरियों से खेलने में मजा आता है।

ट्रंप साहब का ‘मेक इंडिया ग्रेट अगेन’ मिशन!

इस बार वाला केस तो सच में बेमिसाल है। सोचिए जरा – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति का नाम लेकर कोई भारत में आवास प्रमाण पत्र बनवाने आ गया! जांच में पता चला कि fake ID proof और नकली दस्तखतों का इस्तेमाल किया गया था। अच्छा हुआ अधिकारियों ने 24 घंटे के अंदर ही पोल खोल दी। अब तो investigation team भी बैठा दी गई है। और हां, समस्तीपुर के सभी हालिया आवेदन फिर से चेक किए जा रहे हैं। पुलिस वाले तो cyber cell की मदद से उस शातिर को ढूंढने में जुट गए हैं जिसने यह मजाक किया है।

अधिकारी हैरान, जनता परेशान – यह कैसा तमाशा?

इस मामले ने तो सबको झकझोर कर रख दिया है। समस्तीपुर DM साहब तो गंभीर मुद्रा में सख्त कार्रवाई का ऐलान कर चुके हैं। एक निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अब biometric verification अनिवार्य करने पर विचार हो रहा है। लेकिन स्थानीय लोग तो सीधा सवाल पूछ रहे हैं – “यार, ऐसे झूठे आवेदन आते कैसे हैं?” राजनीतिक दलों ने भी मौका नहीं गंवाया। विपक्ष वाले तो सरकार पर data security को लेकर सवाल उठाने लगे हैं। सच कहूं तो यह पूरा मामला प्रशासन की नाकामी को ही दिखाता है।

अब आगे क्या? जांच होगी या फिर सब भूल जाएंगे?

घटना के बाद अब समस्तीपुर में सभी आवेदनों की फिर से जाँच होगी। प्रशासन ने धमकी दी है कि फर्जीवाड़ा करने वालों पर IT Act के तहत केस दर्ज किया जाएगा। निर्वाचन आयोग digital verification process को और टाइट करने में जुट गया है। पर सच तो यह है कि जब तक system में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक ऐसे मजाकिया मामले सामने आते रहेंगे। क्या पता अगली बार कोई और सेलिब्रिटी नाम लेकर आ जाए! एक तरफ तो यह मामला हंसाता है, लेकिन दूसरी तरफ यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि हमारी व्यवस्था में कितने छेद हैं।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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