ग्रेटर बांग्लादेश मैप वाला वो विवाद: क्या सच में खतरा है भारत को?
सुनकर हैरानी होगी, लेकिन हाल में एक ऐसा नक्शा वायरल हुआ है जिसने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। “सल्तनत-ए-बांग्ला” नाम के एक कट्टरपंथी ग्रुप ने ये मैप जारी किया है जिसमें हमारे पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और मिजोरम को… हाँ, सही सुना आपने… बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया है! अब सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ़ एक प्रोपेगैंडा है या फिर कोई बड़ी साजिश? सच कहूँ तो, इस ग्रुप को तुर्की की “Turkish Youth Federation” से सपोर्ट मिलता है, जिसने मामले को इंटरनेशनल लेवल पर उछालने की कोशिश की है।
पीछे की कहानी: क्यों खतरनाक है ये विचारधारा?
असल में देखा जाए तो “सल्तनत-ए-बांग्ला” वाले लोग क्या चाहते हैं? ये लोग बांग्लादेश और भारत के कुछ हिस्सों में इस्लामिक रूल लागू करने की बात करते हैं। है ना चौंकाने वाला? और तो और, इनका तुर्की से गहरा कनेक्शन है – वहाँ की “Turkish Youth Federation” इन्हें फंडिंग और पॉलिटिकल सपोर्ट देती है। ऐतिहासिक तौर पर, ये “ग्रेटर बांग्लादेश” वाला आइडिया कोई नया नहीं है। कुछ कट्टरपंथी ग्रुप पुराने बंगाल प्रांत (जिसमें आज का पूर्वोत्तर भारत शामिल था) को मिलाकर एक बड़ा इस्लामिक देश बनाने का सपना देखते हैं। सोचिए, अगर ऐसा होता तो? डरावना लगता है ना?
जब सरकार ने दी तगड़ी प्रतिक्रिया
मजे की बात ये है कि जब हमारी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने इस मैप को लेकर अलर्ट किया, तब जाकर मामले में हलचल हुई। विदेश मंत्रालय ने तुर्की से सफाई माँगी है। और सोशल मीडिया? वहाँ तो मानो आग लग गई! भारतीय users इसे “देश की एकता पर हमला” बता रहे हैं। कुछ लोग तो सीधे कह रहे हैं – “ये सब पाकिस्तान का हाथ है!” पर सच क्या है? वो तो जाँच से ही पता चलेगा।
राजनीति गरमाई: किसने क्या कहा?
सरकार की तरफ से गृह मंत्रालय ने क्लियर स्टैंड लिया है – ऐसे किसी भी प्रोपेगैंडा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। और बांग्लादेश? उन्होंने तो खुद ही इस मैप से दूरी बना ली है। लेकिन… हमेशा की तरह विपक्ष ने मौके का फायदा उठाया – “सरकार सीमा सुरक्षा में लापरवाही कर रही है!” वाला राग अलापना शुरू कर दिया। सच पूछो तो, चुनाव का मौसम है ना, तो राजनीति तो होगी ही!
आगे क्या? सरकार के पास क्या विकल्प हैं?
अब सवाल यह कि आगे की रणनीति क्या होगी? एक तरफ तो हम तुर्की और बांग्लादेश के साथ डिप्लोमैटिक टॉक कर सकते हैं। दूसरी तरफ, साइबर सेल को सोशल मीडिया पर नज़र रखनी होगी। और हाँ, पूर्वोत्तर में सेक्युरिटी एजेंसियों को और सतर्क रहना होगा। सच तो ये है कि ये कोई साधारण मैप वाला मामला नहीं है – ये तो हमारे देश की अखंडता का सवाल है। और इस पर लापरवाही? बिल्कुल नहीं!
एक बात और – अगर आपको लगता है कि ये सिर्फ़ सरकार का काम है, तो गलत समझ रहे हैं। जागरूक नागरिक होने के नाते हम सबकी भी ज़िम्मेदारी बनती है। है ना?
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ग्रेटर बांग्लादेश नक्शा विवाद – सच्चाई क्या है और हमें क्यों परवाह करनी चाहिए?
1. ये पूरा विवाद क्या है? समझिए आसान भाषा में
देखिए, मामला कुछ यूँ है – बांग्लादेश में कुछ लोगों ने एक नक्शा बनाया है जिसमें हमारे West Bengal, Assam और Tripura जैसे राज्यों को “सल्तनत-ए-बांग्ला” का हिस्सा बताया गया है। अब सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ कुछ लोगों की फैंटेसी है या कोई बड़ी साजिश? असल में, ये नक्शा कुछ radical groups द्वारा promote किया जा रहा है, जिसने दोनों देशों के बीच का माहौल थोड़ा गर्म कर दिया है।
2. कौन-कौन से इलाके इस नक्शे में “खा गए”?
ईमानदारी से कहूं तो ये नक्शा तो जैसे पूरे पूर्वोत्तर को ही निगल गया है! West Bengal तो जैसे पूरा का पूरा, उसके अलावा Assam, Tripura, Meghalaya और Bihar के कुछ हिस्से भी इसमें “ग्रेटर बांग्लादेश” का हिस्सा बताए गए हैं। है न मजेदार बात? ये लोग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दावे कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई क्या है? वो तो शायद उन्हें भी पता नहीं!
3. भारत सरकार ने क्या कहा? रिएक्शन जानिए
हमारी सरकार ने तो इस नक्शे को लेकर एकदम साफ रुख अपनाया है। बिल्कुल खारिज कर दिया। MEA (Ministry of External Affairs) ने इसे “बेबुनियाद और भड़काऊ” बताया है। और सही भी किया! साथ ही बांग्लादेश सरकार से स्पष्टीकरण भी मांगा है। अब देखते हैं आगे क्या होता है।
4. सबसे बड़ा सवाल: क्या बांग्लादेश सरकार की मंजूरी है इसमें?
नहीं यार, बिल्कुल नहीं! बांग्लादेश सरकार ने तो इससे हाथ धो लिए हैं। उनका कहना है कि ये सिर्फ कुछ radical groups की निजी महत्वाकांक्षा है। असल में, बांग्लादेश का official stand तो यही है कि वो भारत के साथ अच्छे संबंधों को प्राथमिकता देता है। तो फिर सवाल यह उठता है – आखिर ये नक्शा विवाद क्यों हो रहा है? किसके हित सध रहे हैं? सोचने वाली बात है…
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com