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ट्रंप के साथ हार्वर्ड की जंग: सालाना 1 अरब डॉलर का खतरा!

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हार्वर्ड बनाम ट्रंप: 1 अरब डॉलर का खेल और एक सियासी जंग!

अरे भाई, क्या बताऊं… हार्वर्ड और ट्रंप की यह लड़ाई तो अब पूरी तरह सियासी मुकाबला बन चुकी है। सालाना 1 अरब डॉलर का सवाल है – यानी लगभग 8,300 करोड़ रुपए! असल में बात यह है कि ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड को फेडरल फंडिंग रोकने की धमकी दे डाली। और कारण? हार्वर्ड का ट्रंप की नीतियों के खिलाफ खुलकर बोलना। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका जैसे देश में यह सब चल सकता है?

पूरा माजरा क्या है? थोड़ा पीछे चलते हैं…

देखिए, हार्वर्ड के लिए यह फंडिंग उसकी रीढ़ की हड्डी जैसी है। खासकर medical research और technology development में तो यह पैसा बिल्कुल ऑक्सीजन की तरह काम करता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से हार्वर्ड के professors और students ट्रंप की immigration policies और climate change पर उनके रवैये को लेकर सड़कों पर उतरते रहे हैं। और ट्रंप साहब? उन्होंने तो सीधे हार्वर्ड को “पॉलिटिकली बायस्ड” बता डाला। सच कहूं तो यह टकराव काफी समय से चल रहा था, बस अब यह खुलकर सामने आया है।

वायरल ट्वीट और उसके बाद का तूफान

मामला तब गरमाया जब ट्रंप ने अपने ट्विटर पर लिखा – “Harvard जैसे elite institutions को federal funding का कोई हक नहीं!” एकदम सीधा और कड़क स्टेटमेंट। हार्वर्ड ने भी पीछे हटने का नाम नहीं लिया – उनका कहना है कि वे academic freedom के लिए लड़ेंगे। अब यहां दिलचस्प बात यह है कि अगर फंडिंग रुकी तो research programs और scholarships पर सीधा असर पड़ेगा। और यह कोई छोटा-मोटा असर नहीं होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर कटौती की नौबत आ सकती है।

किसका साथ, किसका विरोध?

अमेरिका में तो इस मुद्दे ने सचमुच तूफान ला दिया है। एक तरफ prominent educators चेतावनी दे रहे हैं कि यह अमेरिकी research के लिए बुरा साबित होगा। वहीं Harvard के students सड़कों पर उतरने को तैयार हैं – उनका कहना है कि यह शिक्षा का राजनीतिकरण है। राजनीति की बात करें तो Democrats इसे “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला” बता रहे हैं, जबकि Republicans का कहना है कि यह सही कदम है। सच कहूं तो यह मामला अब पैसे से आगे बढ़कर सिद्धांतों की लड़ाई बन चुका है।

अब आगे क्या? कानूनी जंग या सियासी दांव?

तो अब सवाल यह है कि यह सब कहां जाकर रुकेगा? Harvard ने तो कोर्ट जाने की तैयारी कर ली है। Democrats भी कांग्रेस में इस मुद्दे को उठाने वाले हैं। लेकिन असली चिंता की बात यह है कि अगर Harvard पर दबाव बनता है, तो क्या दूसरे universities भी सरकार के सामने झुक जाएंगे? यह academic freedom के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। एक तरह से देखें तो यह लड़ाई अब अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था के भविष्य को लेकर है। और हां, 1 अरब डॉलर तो बस बहाना है, असली मुद्दा तो सत्ता और आजादी का है।

क्या कहें… दिलचस्प तो है ही, साथ ही थोड़ा डरावना भी। क्योंकि जब राजनीति और शिक्षा आपस में टकराते हैं, तो नतीजे अक्सर अच्छे नहीं होते। लेकिन देखते हैं, इस बार क्या होता है!

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देखिए, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की यह लड़ाई सिर्फ़ डॉलर-पैसे की बात नहीं है। असल में, यह तो उनकी पूरी इज्ज़त और आने वाले कल का सवाल है। और ट्रंप के साथ यह टकराव? इसका असर तो अगले दो-तीन सालों में साफ़ दिखने लगेगा।

अब सोचिए, अगर हार्वर्ड ने सही चाल नहीं चली तो? सालाना 1 अरब डॉलर का घाटा… ये कोई मज़ाक नहीं है भाई! ये तो वैसा ही है जैसे आपके घर का सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम ही गायब हो जाए।

और हाँ, इस मामले पर नज़र रखना तो बनता ही है। क्योंकि अभी तो पूरी कहानी का सिर्फ़ पहला अध्याय ही शुरू हुआ है। है न?

ट्रंप vs हार्वर्ड: 1 अरब डॉलर का खेल – और आपके दिमाग में उठ रहे सवाल

1. ट्रंप और हार्वर्ड की ये जंग असल में है किस बात की?

देखिए, मामला तो टैक्स, पैसे और राजनीति का है। पर असल बात ये है कि ट्रंप साहब ने हार्वर्ड पर आरोप लगा दिया है कि वो अपने टैक्स-एग्जेंप्ट स्टेटस का फायदा उठा रहा है। और ये कोई छोटा-मोटा मामला नहीं – बात हो रही है सालाना 1 अरब डॉलर की! अब आप ही सोचिए, इतने पैसे में तो… खैर, ये अलग बात है।

2. हार्वर्ड के छात्रों को इससे क्या फर्क पड़ेगा? सच-सच बताओ!

अगर हार्वर्ड को टैक्स-एग्जेंप्ट स्टेटस गंवाना पड़ा तो? सीधा असर तो फीस पर पड़ेगा ही – वो भी कितना बढ़ेगी, कोई नहीं जानता। रिसर्च के लिए फंडिंग, हॉस्टल की सुविधाएं, यहां तक कि लाइब्रेरी की किताबें तक प्रभावित हो सकती हैं। पर अभी तक कुछ तय नहीं हुआ, तो घबराने की कोई बात नहीं।

3. क्या ट्रंप के पास हार्वर्ड को टैक्स भरने पर मजबूर करने की ताकत है?

सुनिए, अमेरिकी कानून के मुताबिक IRS और फेडरल गवर्नमेंट को ये अधिकार है कि वो नॉन-प्रॉफिट संस्थाओं की टैक्स छूट की समीक्षा कर सकते हैं। ट्रंप इसे आगे बढ़ा सकते हैं, मगर अंतिम फैसला? वो तो कोर्ट या कांग्रेस के हाथ में होगा। यानी अभी ये मामला लंबा खिंच सकता है।

4. क्या हार्वर्ड अकेला निशाना है या और भी हैं ट्रंप की लिस्ट में?

अरे भई नहीं! ट्रंप तो पहले से ही एलीट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस को निशाना बना रहे हैं। पर हार्वर्ड इसकी सबसे बड़ी और चर्चित टारगेट है। क्यों? क्योंकि… [अगले पैराग्राफ के लिए क्लिफहैंगर]

Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com

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