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हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का कहर: 105 मौतें, 35 लापता, 800 करोड़ से अधिक का नुकसान

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हिमाचल प्रदेश में बारिश का कहर: 105 जानें गईं, 35 लापता… और एक बड़ा सवाल

अगर आपको लगता है कि हिमाचल सिर्फ ठंडी हवाओं और खूबसूरत वादियों का नाम है, तो इन तीन दिनों ने सबकुछ बदल दिया है। जी हाँ, पिछले 72 घंटे से राज्य प्रकृति के गुस्से का शिकार बना हुआ है। बारिश और भूस्खलन ने ऐसी तबाही मचाई है कि आंकड़े देखकर दिल दहल जाता है – 105 मौतें, 35 लोग जिनका अभी तक कोई अता-पता नहीं, और संपत्ति का नुकसान तो 800 करोड़ को भी पार कर गया है। ये सिर्फ आंकड़े नहीं, पूरे राज्य के लिए एक झटका है।

क्या ये सच में ‘अप्रत्याशित’ था?

मानसून में हिमाचल का बारिश से पाला पड़ना नई बात तो नहीं। लेकिन इस बार? सच कहूं तो पिछले 10 सालों में इतनी भयानक तबाही कभी नहीं देखी। मौसम विभाग ने लाल अलर्ट जरूर दिया था, पर ये बारिश तो जैसे किसी बड़े इरादे से आई हो। और सबसे डरावनी बात? पिछले साल भी ऐसा ही कुछ हुआ था, जब 70 से ज्यादा जिंदगियां चली गई थीं। क्या अब भी हम जलवायु परिवर्तन को नजरअंदाज करते रहेंगे?

जमीनी हालात: जहां आसमान ने जमीन को निगल लिया

शिमला, कुल्लू, मनाली – ये नाम आपको हनीमून की याद दिलाते होंगे, लेकिन आज यहां के हालात किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं। कई गांवों तक पहुंचने के रास्ते ही गायब हो चुके हैं। 50 से ज्यादा पुल टूट चुके हैं, 200 सड़कें… अरे भई, ये तो पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ही धराशायी हो गया है! और तो और, कई इलाकों में तो mobile network तक नहीं – जैसे दुनिया से कट गए हों।

राहत कार्य: संघर्ष और उम्मीद की कहानी

NDRF और सेना की टीमें जान जोखिम में डालकर काम कर रही हैं। अब तक 1000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। लेकिन समस्या ये कि बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही। राज्य सरकार ने राहत शिविर लगाए हैं, पर क्या ये काफी है? असल में, ये तो सिर्फ शुरुआत है।

राजनीति से ज्यादा जरूरी इंसानियत

मुख्यमंत्री सुक्खू जी ने केंद्र से मदद मांगी है, अमित शाह जी ने आश्वासन दिया है। ये सब ठीक है। लेकिन मनाली के एक स्थानीय निवासी की बात सुनिए: “हमने कभी ऐसा नहीं देखा। अब न सिर्फ मदद, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए।” क्या हम इस बार सीखेंगे?

आगे का रास्ता: पैसा या प्लान?

केंद्र ने 500 करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की है, task force बनाई जा रही है। पर सच तो ये है कि अगले साल फिर यही न हो, इसके लिए हमें अभी से सोचना होगा। खासकर tourism पर ध्यान देना होगा, क्योंकि हिमाचल की अर्थव्यवस्था तो इसी पर टिकी है। एक बात तो तय है – अब सिर्फ पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि पूरी तरह से तैयार रहने की जरूरत है। वरना… अगली बार शायद हम इतने भाग्यशाली न हों।

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हिमाचल में इतनी भयानक बारिश क्यों हो रही है?

सच कहूं तो, ये सिर्फ ‘बारिश’ नहीं, बल्कि प्रकृति का कहर है। मॉनसून तो हर साल आता है, लेकिन इस बार? climate change ने गेम ही बदल दिया। और हां, जब बादल फटते हैं (cloudburst), तो ऐसा ही होता है – एकदम अचानक, बिना किसी चेतावनी के। स्थानीय लोग तो कह रहे हैं कि इतनी बारिश उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।

नुकसान का आंकड़ा – और डरावना सच

अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि 105 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। 35 लोग? अभी भी पता नहीं। और जब property damage की बात करें तो… 800 करोड़ रुपये! ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की तबाही की कहानी है।

सरकार क्या कर रही है? क्या काफी है?

NDRF की टीमें दिन-रात काम कर रही हैं, ये तो अच्छी बात है। Relief camps बने हैं, पैसे की मदद का वादा भी हुआ है। Army और Air Force भी मैदान में उतर चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सब पर्याप्त है? क्योंकि जरूरतें तो बहुत ज्यादा हैं।

आप और हम – कैसे कर सकते हैं मदद?

देखिए, हर छोटी मदद मायने रखती है। अगर पैसे donate कर सकते हैं – बढ़िया। नहीं तो, राशन, कपड़े, दवाइयाँ – कुछ भी। Volunteer करने का वक्त निकालिए। या फिर social media पर verified helpline numbers share करिए – ये भी बड़ी मदद है। Red Cross जैसे भरोसेमंद NGOs के through भी help पहुँच सकती है। एक बात याद रखिए – इस वक्त हर हाथ की जरूरत है।

PS: अगर आप हिमाचल के हैं या वहां के किसी को जानते हैं, तो कमेंट में बताइए – लोगों तक सही जानकारी पहुँचाने में मदद होगी।

Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com

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