कर्नाटक का अनोखा फैसला: ₹30 करोड़ में कुत्तों को खिलाया जाएगा चिकन-चावल!
सुनने में थोड़ा अजीब लगता है न? पर सच है! कर्नाटक सरकार ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एक ऐसी योजना बनाई है जिस पर चर्चा होनी तय है। BBMP (Bruhat Bengaluru Mahanagara Palike) की इस स्कीम के तहत राज्य भर के stray dogs को पौष्टिक चिकन-चावल खिलाया जाएगा। और हैरानी की बात ये कि इसके लिए ₹30 करोड़ का बजट रखा गया है। सरकार का दावा है कि यह न सिर्फ कुत्तों के लिए अच्छा होगा, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिहाज से भी फायदेमंद साबित होगा।
पर ये सब शुरू क्यों हुआ?
असल में बात ये है कि बेंगलुरु समेत कर्नाटक के कई शहरों में आवारा कुत्तों की संख्या बेतहाशा बढ़ गई है। और समस्या सिर्फ संख्या की नहीं है। इन कुत्तों के कारण सड़क हादसे बढ़े हैं, काटने की घटनाएं बढ़ी हैं, और रेबीज जैसी बीमारियों का खतरा भी। अब तक तो सिर्फ sterilization और vaccination पर ही ध्यान दिया जाता था। लेकिन अब सरकार ने एक नया तरीका अपनाया है – भूखे कुत्ते ज्यादा गुस्सैल होते हैं, तो क्यों न उन्हें पेट भर खाना दिया जाए? थोड़ा सा कॉमन सेंस वाला सॉल्यूशन लगता है, है न?
कैसे काम करेगी ये योजना?
तो स्कीम कुछ यूं है – BBMP के अंतर्गत आने वाले इलाकों में stray dogs को रोजाना पका हुआ चिकन और चावल दिया जाएगा। शुरुआत में ये प्रोजेक्ट ₹30 करोड़ के बजट के साथ बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में चलेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे कुत्तों का स्वास्थ्य तो सुधरेगा ही, साथ ही उनकी आक्रामकता भी कम होगी। एक तरह से ये पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा का कॉम्बो प्लान है।
लोग क्या कह रहे हैं?
अब जाहिर है, ऐसे अनोखे फैसले पर राय अलग-अलग होनी ही थी। BBMP के अधिकारियों का कहना है कि ये एक प्रैक्टिकल सॉल्यूशन है। कई animal rights activists ने इसकी तारीफ भी की है। पर कुछ लोगों को ये फिजूलखर्ची लग रही है – उनका सवाल है कि जब इतने सारे गरीब भूखे सोते हैं, तो कुत्तों पर इतना पैसा क्यों बहाया जा रहा है? वहीं दूसरी तरफ, पशुप्रेमियों का मानना है कि एक सभ्य समाज की पहचान यही है कि वो सभी जीवों की देखभाल करे।
सच कहूं तो ये बहस बिल्कुल वैसी ही है जैसी तब होती है जब कोई मंदिर में चढ़ावे पर पैसा खर्च करता है। हर किसी की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं हैं।
आगे क्या?
अगले कुछ महीनों में ये योजना शुरू होगी और फिर पता चलेगा कि ये वाकई काम करती है या नहीं। अगर सफल रही, तो हो सकता है दूसरे राज्य भी ऐसा ही कुछ करने लगें। पर एक बात तो तय है – सिर्फ खाना खिला देने से ये समस्या हल नहीं होगी। sterilization, vaccination और जागरूकता – इन सब पर भी समान रूप से काम करना होगा।
कर्नाटक सरकार का ये कदम निश्चित तौर पर एक साहसिक प्रयोग है। पर सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक टेम्पररी फिक्स होगा, या फिर वाकई में एक मॉडल बन पाएगा? वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो ये खबर सुनकर बेंगलुरु के कुत्ते शायद खुश हो रहे होंगे – आखिरकार उन्हें अब घर-घर जाकर भीख नहीं मांगनी पड़ेगी!
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सुनकर थोड़ा अजीब लगता है न? पर तेलंगाना सरकार ने सच में ये अनोखा फैसला लिया है। चलिए, बात करते हैं इसके पीछे की कहानी…
1. ये पागलपन या फिर सोचा-समझा कदम?
असल में, तेलंगाना के मुख्यमंत्री KCR (K. Chandrashekar Rao) ने ये योजना बनाई है। और सुनिए – स्ट्रीट डॉग्स को रोजाना चिकन-चावल खिलाने पर सरकार ₹30 करोड़ खर्च करने वाली है! है न मजेदार?
2. इतना पैसा क्यों फूंक रही है सरकार?
देखिए, यहां दो बातें हैं। एक तो स्ट्रे डॉग्स की बढ़ती आबादी को कंट्रोल करना। दूसरा… और ये ज्यादा अहम है… इन्हें पौष्टिक खाना देकर उनके aggressive behavior में कमी लाना। सरकार का दावा है कि इससे सड़कों पर कुत्तों के हमले कम होंगे। लेकिन सच कहूं तो, ये एक तरह का social experiment ही तो है!
3. पैसे की बर्बादी या जरूरी खर्च?
अब यही तो बहस का मुद्दा है! कई लोग कह रहे हैं – “भाई, इतने पैसे में तो गरीबों के लिए…” लेकिन सरकार की दलील है कि ये long-term investment है। जानवरों के साथ इंसानों का झगड़ा कम होगा तो सबका भला। पर सवाल तो उठता ही है – क्या ये सच में सबसे बेहतर तरीका था?
4. क्या पूरे भारत में ऐसा होगा?
अभी तो तेलंगाना में ट्रायल चल रहा है। अगर यहां कामयाबी मिली, तो देखना ये है कि दूसरे राज्य भी इस राह पर चलेंगे या नहीं। खासकर केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्य जहां स्ट्रे डॉग्स की समस्या कुछ ज्यादा ही है। वैसे… एक बात तो तय है – अगर ये योजना चल निकली, तो भारत के कुत्ते दुनिया के सबसे खुशकिस्मत कुत्ते हो जाएंगे! है न?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

