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“भारत की मिसाइल ताकत से डरा पाकिस्तान-चीन-बांग्लादेश गठजोड़! सार्क का विकल्प नहीं बना पाएंगे?”

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भारत की मिसाइल ताकत ने पाक-चीन-बांग्लादेश को डरा दिया? क्या SAARC का विकल्प बन पाएगा ये गठजोड़?

अरे भाई, हालात तो देखो! भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से वही पुरानी न्यूक्लियर तनातनी शुरू हो गई है। सच कहूं तो अब ये धमकियां थोड़ी बासी लगने लगी हैं। भारत ने साफ-साफ कह दिया कि अब वो “न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग” वाली बातें सुनने को तैयार नहीं है। और पाकिस्तान? उनका जवाब तो हमेशा की तरह – “भारत हताश है, असुरक्षित है” वाला रेकॉर्ड बजा दिया। लेकिन असली मजा तो तब आया जब चीन और बांग्लादेश भी इस झगड़े में कूद पड़े। क्या ये तिकड़ी भारत की बढ़ती मिसाइल ताकत से डर गई है? और सबसे बड़ा सवाल – क्या ये गठजोड़ SAARC जैसे संगठन को बेकार साबित कर देगा?

पुरानी कहानी, नए ट्विस्ट के साथ

देखिए, भारत-पाक न्यूक्लियर झगड़ा कोई नई बात तो है नहीं। 1998 के परमाणु परीक्षण याद हैं न? उसके बाद से ये रिश्ता और भी जहरीला होता गया। लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत ने जो मिसाइल टेक्नोलॉजी में कमाल किया है – अग्नि-V हो या ब्रह्मोस – उसने गेम ही बदल दिया है। एक तरफ तो हमारी मिसाइलों की रेंज बढ़ी है, दूसरी तरफ पाकिस्तान चीन और बांग्लादेश के साथ गले मिलता नजर आ रहा है। कुछ लोग इसे “भारत विरोधी गुट” बता रहे हैं तो कुछ कह रहे हैं कि ये तो बस नया सुरक्षा समीकरण है। आप क्या सोचते हैं?

हालिया हलचल: क्या है नया?

इस हफ्ते की बात करें तो भारत ने पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकियों को बकवास बताते हुए अपनी सेना को और मजबूत करने का ऐलान किया। पाकिस्तान का जवाब? “भारत असुरक्षा फैला रहा है” वाला पुराना राग। लेकिन असली चिंता की बात ये है कि चीन-पाक-बांग्लादेश मिलकर मिलिट्री एक्सरसाइज कर रहे हैं। और हम? हमने तो अग्नि-V का टेस्ट करके साफ कर दिया कि अब हमारी पहुंच सिर्फ 5,000 किमी तक ही नहीं है। ये मिसाइल सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, चीन को भी मैसेज देने के लिए काफी है। सच कहूं तो बहुत कूल मूव था!

एक्सपर्ट्स की राय: क्या कह रहे हैं जानकार?

भारतीय रक्षा मंत्रालय का स्टैंड क्लियर है – “हम किसी से नहीं डरते”। पाकिस्तान? उनका तो हमेशा का रटा-रटाया जवाब – “भारत हताश है”। लेकिन असली बात तो डॉ. अजय शुक्ला ने कही – “पाक-चीन गठजोड़ चुनौती जरूर है, लेकिन हमारी मिसाइल ताकत के आगे ये टिक नहीं पाएगा।” बांग्लादेश ने थोड़ा सॉफ्ट रुख अपनाया – “हम किसी के खिलाफ नहीं”। पर सच तो ये है कि अब सबको भारत की ताकत का अंदाजा हो गया है। और ये बात दिलचस्प है!

आगे क्या? भविष्य के अनुमान

ईमानदारी से कहूं तो ये तनाव तो बना रहेगा। न्यूक्लियर और मिसाइल टेक्नोलॉजी की होड़ थमने वाली नहीं। चीन-पाक-बांग्लादेश का ये नया गठजोड़ और मजबूत हो सकता है। SAARC? वो तो पहले से ही लंगड़ा चल रहा था। अब तो लगता है कि क्षेत्रीय सहयोग के नए मॉडल आने वाले हैं। एक बात तो तय है – भारत की मिसाइल ताकत ने इस पूरे खेल को ही बदल दिया है। अब सभी देशों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी। क्या आपको नहीं लगता कि अब दक्षिण एशिया का पूरा पावर इक्वेशन ही बदल गया है?

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भारत की मिसाइल ताकत और SAARC का सच: क्या जानते हैं आप?

पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश को क्यों सताती है भारत की मिसाइलें?

देखिए, Agni-V और BrahMos जैसी मिसाइलों ने भारत को जो strategic edge दिया है, वो तो किसी से छुपा नहीं। पर सवाल यह है कि पाकिस्तान और चीन इतना परेशान क्यों हैं? असल में, इन मिसाइलों की range और accuracy का मतलब है कि अब हमारे पड़ोसियों के पास ‘घबराने’ की वजह तो है ही। और बांग्लादेश? उनका चीन के साथ गठजोड़ तो जगजाहिर है ना!

SAARC का विकल्प ढूंढने में क्यों फेल हो रहे हैं हमारे पड़ोसी?

ईमानदारी से कहूं तो – SAARC में भारत का दबदबा और India-Pakistan की लड़ाई ने इस संगठन को लगभग बेकार कर दिया है। चीन ने BIMSTEC जैसे नए रास्ते तलाशे, लेकिन भारत की diplomacy और आर्थिक ताकत के आगे ये सब फीके पड़ गए। सच तो यह है कि बिना भारत के, कोई भी regional forum कामयाब नहीं हो सकता। है न मजेदार बात?

मिसाइल टेक्नोलॉजी में भारत कहां खड़ा है?

एक तरफ तो हम चीन से थोड़े पीछे हैं – मान लीजिए, वो अभी 10वीं क्लास में हैं तो हम 8वीं में। लेकिन पाकिस्तान? उनका तो हमसे कोई comparison ही नहीं! Agni-V की 5000km range और BrahMos की supersonic speed ने हमें जो advantage दिया है, वो किसी सपने से कम नहीं। और अच्छी खबर? हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। धीरे-धीरे, पर लगातार।

क्या मिलिट्री ताकत बिगाड़ रही है पड़ोसियों से रिश्ते?

नहीं यार, ऐसा बिल्कुल नहीं है! भारत हमेशा से ‘लाठी भी और बात भी’ वाली नीति पर चला है। military strength बढ़ाने के साथ-साथ हमने बांग्लादेश, Nepal जैसे देशों से रिश्ते सुधारे भी हैं। पाकिस्तान और चीन के साथ तनाव? वो तो border disputes और राजनीति का खेल है। मिलिट्री power तो बस एक पहलू है। समझ रहे हैं न मेरी बात?

Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com

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