क्या सच में ऑपरेशन सिंदूर के चलते बंद हुआ कारतारपुर कॉरिडोर? MEA ने संसद में क्या कहा, जानिए पूरा मामला!
देखिए, ये मामला थोड़ा पेचीदा है। हाल ही में MEA ने संसद में एक बयान दिया जिसने सबको हैरान कर दिया। असल में, ऑपरेशन सिंदूर के बाद से करतारपुर कॉरिडोर की सुविधा ठप्प पड़ी है। याद है न वो रास्ता जो सिख भाईयों को बिना visa के सीधे पाकिस्तान के गुरुद्वारा दरबार साहिब तक पहुँचाता था? अब वो बंद। और ये सिर्फ एक परिवहन मार्ग नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा मसला है।
पीछे की कहानी: शुरुआत तो अच्छी थी, फिर क्या हुआ?
2019 की बात है जब ये कॉरिडोर खुला था। उस वक्त तो लगा था जैसे भारत-पाक के बीच कुछ अच्छा होने वाला है। एक तरह की शांति पहल थी ये। पर…हमेशा की तरह एक ‘पर’ आ ही गया। पाकिस्तान ने अचानक हर तीर्थयात्री से 20 डॉलर वसूलने शुरू कर दिए! भारत सरकार को ये बिल्कुल नहीं भाया। साफ कहा कि ये तो धर्म के साथ व्यापार हो गया। और फिर? फिर तो झगड़ा बढ़ता ही गया।
2023 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद तो हालात और खराब हो गए। इतने कि इस पूरे कॉरिडोर पर ही सवालिया निशान लग गया। सच कहूँ तो, जब दोनों देशों के रिश्ते ही खटाई में हों, तो ऐसी योजनाएँ कैसे चलेंगी?
MEA का स्पष्टीकरण: “अभी नहीं चलेगा कॉरिडोर”
संसद में MEA ने जो कहा, वो साफ था – कॉरिडोर पर अस्थायी रोक। कारण? पाकिस्तान इसे राजनीतिक हथियार बना रहा था, जो हमारी सुरक्षा के लिए ठीक नहीं। हैरानी की बात ये कि पाकिस्तान की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया। चुप्पी साधे बैठे हैं वो लोग।
किसको क्या लगा? प्रतिक्रियाओं का अंबार
सिख समुदाय के लोग तो मानो दिल से टूट गए। उनका कहना है कि ये उनके धार्मिक अधिकारों पर चोट है। वहीं विपक्ष के नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाए – “क्या ये कदम रिश्तों को और बिगाड़ेगा?” सच्चाई ये है कि दोनों तरफ के लोग परेशान हैं।
एक्सपर्ट्स की राय? उनका कहना है कि ये पूरा मामला दिखाता है कि दोनों देशों के बीच विश्वास की कितनी कमी हो चुकी है। बिना भरोसे के ऐसी कोई योजना कैसे चलेगी भला?
आगे क्या? अंधेरे में भविष्य
अगर ये रुकावट लंबी चली तो? फिर सिख यात्रियों को पुराने तरीके से visa लेकर जाना होगा – जो कि एक पेंचीदा और लंबा प्रोसेस है। हाँ, भारत सरकार बातचीत तो कर सकती है, पर मौजूदा हालात को देखते हुए…उम्मीद कम ही दिखती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ये मुद्दा गरमा सकता है। क्योंकि ये सीधे धार्मिक आज़ादी से जुड़ा है। कई वैश्विक संस्थाएँ इस पर नज़र गड़ाए बैठी हैं। पर क्या वाकई कोई हल निकलेगा? ये तो वक्त ही बताएगा।
आखिर में: एक और रस्साकशी?
सच तो ये है कि करतारपुर कॉरिडोर का ये हाल भारत-पाक के बीच एक और डेडलॉक पैदा कर रहा है। बड़ा सवाल ये कि क्या दोनों देश बैठकर इसका हल निकालेंगे, या फिर ये मार्ग हमेशा के लिए बंद हो जाएगा? जब तक दोनों तरफ से विश्वास की कमी है, तब तक…समझदार को इशारा काफी है।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com