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“किसानों के हित में भारी कीमत चुकाने को तैयार हैं PM मोदी, अमेरिका को दिया सख्त संदेश”

क्या मोदी सरकार किसानों के लिए अमेरिका से टकराने को तैयार है? एक बड़ा सवाल…

अरे भाई, क्या बात है न! प्रधानमंत्री मोदी ने तो अमेरिकी सरकार को सीधे-सीधे चुनौती दे दी है। हाल ही में अमेरिका ने हमारे सामानों पर जो अतिरिक्त tariff लगाया था, उस पर PM ने बिना लाग-लपेट के जवाब दिया है। और सच कहूं तो, यह जवाब सुनकर गर्व होता है। उन्होंने साफ कहा – “हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे डेयरी वाले… इनके हितों से समझौता नहीं होगा, चाहे दुनिया की कोई भी ताकत क्यों न खड़ी हो जाए।” वाह! बात तो एकदम सही है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या हम वाकई इसे अमल में ला पाएंगे?

पूरा मामला क्या है? समझते हैं…

देखिए, बात कुछ यूं है। पिछले कुछ महीनों से अमेरिका हम पर नाराज़ था क्योंकि हम रूस से सस्ता तेल खरीद रहे थे। उनका तर्क? “यूक्रेन वॉर के दौर में रूस को सपोर्ट कर रहे हो!” लेकिन हमारी सरकार का स्टैंड क्लियर है – पहले देश का फायदा, बाकी सब बाद में। और सच मानिए, यह वही बात है जो मोदी ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नारे में कहते आए हैं। पर क्या आपको नहीं लगता कि यह सब कहने से ज़्यादा ज़रूरी है इसे जमीन पर उतारना?

अब तक क्या हुआ? अपडेट्स

तो सुनिए, PM ने जैसे ही यह बयान दिया, सरकार ने तुरंत एक्शन ले लिया। कुछ अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर जवाबी tariff लगाने की तैयारी शुरू हो गई। विदेश मंत्रालय वाले तो बिल्कुल साफ़ बोले – “हम किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे।” अच्छी बात है, लेकिन एक पल रुकिए… क्या technology और defence सेक्टर पर इसका असर नहीं पड़ेगा? यही तो बड़ा सवाल है!

किसने क्या कहा? प्रतिक्रियाएं

अब ज़रा लोगों की प्रतिक्रियाएं देखिए। किसान नेता खुश हैं – “सरकार ने सही कदम उठाया!” वहीं विपक्ष वाले तो हमेशा की तरह शक की नज़र से देख रहे हैं – “क्या यह सिर्फ़ दिखावा है?” और अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स? वे कह रहे हैं कि यह टकराव हमारे लिए महंगा पड़ सकता है। सच कहूं तो, हर तरफ़ अलग-अलग राय है। आप किसकी बात मानेंगे?

अब आगे क्या? कुछ अंदाज़ा…

तो अब क्या होगा? शायद दोनों देश बैठकर कोई समझौता कर लें। या फिर हमें दूसरे देशों के साथ डील बढ़ानी पड़े। कुछ सूत्रों का कहना है कि किसानों के लिए नई योजनाएं आ सकती हैं। पर याद रखिए, यह सिर्फ़ शुरुआत है। असली टेस्ट तो अभी आना बाकी है – जब अमेरिका अपना जवाब देगा।

आखिरी बात: क्या यह सही फैसला है?

एक बात तो तय है – भारत अब पीछे नहीं हटेगा। ‘लोकल फॉर वोकल’ सिर्फ़ नारा नहीं, इसे साबित भी करना होगा। मोदी सरकार ने जो रुख अपनाया है, वह सराहनीय है। लेकिन… हमेशा एक लेकिन होता है न? क्या हम वाकई इसकी कीमत चुका पाएंगे? वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो यही कहूंगा – देश के हित में यह कदम सही लगता है, बस इसे सही तरीके से आगे बढ़ाना होगा। आप क्या सोचते हैं?

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प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर साफ कर दिया – भारत के किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं। अमेरिका जैसी महाशक्ति का दबाव हो या कोई और, हम झुकने वाले नहीं। और सच कहूं तो, यह सिर्फ किसानों के बारे में नहीं है। देखा जाए तो यह पूरे देश के आत्मसम्मान का सवाल है।

अब सोचिए, जब तक हमारा किसान मजबूत नहीं होगा, तब तक देश कैसे मजबूत होगा? यह फैसला सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता ही है, साथ ही एक संदेश भी देता है – भारत अब वह पुराना भारत नहीं रहा जो दबाव में आकर फैसले लेता था।

हालांकि, सवाल यह भी उठता है कि क्या यह सिर्फ बयानबाजी है या असली मंशा? पर मोदी सरकार के पिछले रिकॉर्ड को देखें तो… उन्होंने जो कहा, वो किया भी है। जैसे GST लागू करना हो या surgical strike, बात और काम में कोई फर्क नहीं।

एक तरफ तो यह फैसला किसानों को सपोर्ट देता है, दूसरी तरफ यह दुनिया को भी संदेश देता है – भारत अब global politics में नया गेम खेलने आया है। और हां, यह बात सिर्फ मैं नहीं कह रहा। आप खुद देख लीजिए – पिछले कुछ सालों में कितने देश भारत की तरफ देखने लगे हैं।

सच तो यह है कि यह सिर्फ एक agriculture policy नहीं, बल्कि भारत के नए आत्मविश्वास की मिसाल है। और यह आत्मविश्वास… यही तो असली ताकत है।

PM Modi के किसानों के लिए बड़े फैसले – जानिए पूरा मामला

1. आखिर PM मोदी ने किसानों के लिए क्या खास ऐलान किया?

देखिए, बात सीधी है – PM मोदी ने साफ़ कह दिया है कि भारत अपने किसानों की कीमत पर कोई समझौता नहीं करेगा। और ये सिर्फ़ शब्द नहीं हैं, अमेरिका को भी इसका सख्त संदेश मिल चुका है। असल में, ये पूरा मूव MSP और agriculture exports को लेकर है। जैसे आप अपने घर के लिए लड़ते हैं, वैसे ही सरकार किसानों के लिए लड़ रही है। सच कहूं तो, ये एक बोल्ड स्टेप है!

2. अमेरिका को भेजा गया ये सख्त संदेश क्या है?

तो सुनिए… मोदी सरकार ने बिल्कुल क्लियर कर दिया है – “हमारे किसान, हमारे नियम”। चाहे WTO हो या international trade, भारत अब पीछे हटने वाला नहीं। एक तरफ तो ये हमारे किसानों के लिए अच्छा है, लेकिन दूसरी तरफ ये दुनिया को भी संदेश देता है कि अब भारत अपने फैसले खुद लेगा। क्या आपको नहीं लगता कि ये एक ताकतवर स्टेटमेंट है?

3. असल में किसानों को क्या मिलेगा इससे?

अरे भाई, सबसे बड़ी बात तो ये कि MSP की गारंटी मिलेगी। मतलब आपकी मेहनत की कीमत सुरक्षित। फिर चाहे बात agriculture exports की हो या international market में अपनी income की – सबमें सपोर्ट मिलेगा। और तो और, नई schemes भी आ सकती हैं। एकदम वन-टू-थ्री का फॉर्मूला! लेकिन सच पूछो तो असली टेस्ट अब इम्प्लीमेंटेशन का है।

4. क्या ये भारत-अमेरिका के trade relations को खराब कर देगा?

सुनिए, थोड़ा तनाव तो होगा ही – जैसे दो दोस्तों में कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं। Short-term में कुछ झटके लग सकते हैं। पर long-term में देखें तो ये हमारे trade policies को और मजबूत बनाएगा। आखिरकार, अपने किसान और अपनी economy को priority देना तो जायज़ है न? सच कहूं तो, कभी-कभी थोड़ी टकराहट अच्छी होती है – ये हमें और स्ट्रॉन्ग बनाती है!

Source: Times of India – Main | Secondary News Source: Pulsivic.com

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