ट्रंप की जीत से बांग्लादेश की मुश्किलें बढ़ेंगी! जिस अमेरिकी दम पर भारत को आंख दिखा रहा था, अब वही होगा पड़ोसी का दुश्मन
अरे भाई, पाकिस्तान की हालत तो देखो – जैसे बिना तेल की रस्सी पर चल रहा हो। IMF का जो बेलआउट पैकेज उनकी जान बचा रहा था, वही अब डांवाडोल होता नज़र आ रहा है। सच कहूं तो IMF ने जो 5 शर्तें रखी थीं, उनमें से 3 तो पूरी ही नहीं हुईं। और अब? अब तो IMF भी गुस्से में है। ऊपर से अमेरिकी चुनावों में ट्रंप के वापस आने की आहट… ये सब मिलकर पाक-बांग्लादेश जैसे देशों के लिए नई मुसीबतें ला सकता है।
पाकिस्तान का IMF के साथ टकराव
देखिए न, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तो पहले से ही ICU में पड़ी है। विदेशी मुद्रा भंडार गिर रहा है, महंगाई आसमान छू रही है – ऐसे में IMF का पैसा ही तो उनकी लाइफलाइन थी। पर यहां भी मजा देखिए – IMF ने कर सुधार, ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव जैसी शर्तें रखी थीं न? वो सब धरे के धरे रह गए। अब IMF का रुख सख्त हो गया है। साफ-साफ कह दिया है – “शर्तें पूरी नहीं की तो पैसा बंद!” बेचारे पाकिस्तान के पास अब क्या विकल्प बचा है?
ट्रंप की वापसी से बदल सकता है समीकरण
अब जरा अमेरिका की तरफ देखिए। 2024 के चुनावों में ट्रंप के वापस आने की संभावना ने तो पूरा गेम ही बदल दिया है। याद है न 2017-20 में कैसे ट्रंप ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता में कटौती कर दी थी? अगर ये साहब फिर से आ गए तो… खैर, आप समझ ही गए होंगे। विशेषज्ञ तो यहां तक कह रहे हैं कि आतंकवाद के मामले में ट्रंप पाकिस्तान के साथ और सख्ती से पेश आ सकते हैं। बस, फिर देखिए मजा!
पाकिस्तानी सरकार की मुश्किलें
पाकिस्तानी सरकार का तो बुरा हाल है। वो कह रहे हैं कि “भई, IMF की शर्तें पूरी करना हमारे बस की बात नहीं”। पर सच तो ये है कि अगर IMF का पैसा रुक गया तो? डिफॉल्ट का खतरा! पाकिस्तानी रुपया पहले ही लुढ़क रहा है, विदेशी मुद्रा भंडार तो बस नाम का रह गया है। ऐसे में IMF के बिना ये नाव कैसे चलेगी? सोचकर ही डर लगता है।
बांग्लादेश के लिए भी खतरा
और हां, इस पूरे मामले में बांग्लादेश भी बिल्कुल सेफ नहीं है। ट्रंप अगर वापस आ गए तो उनकी अमेरिकी सहायता भी कट सकती है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भी तो पहले से ही दबाव में है। राजनीतिक विश्लेषक तो कह रहे हैं कि ट्रंप दक्षिण एशिया में अपनी नीतियों को और सख्ती से लागू कर सकते हैं। मतलब साफ है – पाकिस्तान और बांग्लादेश, दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
निष्कर्ष: पाकिस्तान के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी
तो साफ है कि पाकिस्तान के लिए अगले कुछ महीने बेहद अहम होने वाले हैं। एक तरफ IMF का दबाव, दूसरी तरफ अमेरिकी राजनीति में होने वाले बदलाव। अगर IMF की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो? और प्रतिबंध! ट्रंप वापस आ गए तो? अमेरिकी सहायता में कटौती! सच कहूं तो पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों को ही अभी कुछ कड़े समय से गुजरना पड़ सकता है। देखते हैं, ये सब कैसे unfold होता है।
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ट्रंप की जीत और बांग्लादेश की मुश्किलें – जानिए पूरा माजरा
1. अरे भाई, ट्रंप जीत गए तो बांग्लादेश के लिए मुसीबत क्यों?
देखो, ट्रंप साहब तो वैसे भी अपने अंदाज़ के लिए मशहूर हैं। अब सवाल यह है कि क्या उनकी जीत से अमेरिका की foreign policy पलट जाएगी? मुमकिन है! वो human rights और democracy के नाम पर बांग्लादेश जैसे देशों पर ज़्यादा सख़्त हो जाएं। और अगर ऐसा हुआ तो… अमेरिकी मदद में कटौती तो लगभग तय है। ठीक वैसे ही जैसे पिछली बार उन्होंने कुछ अफ्रीकी देशों के साथ किया था।
2. भारत-बांग्लादेश रिश्ते: क्या बदलेगा गेम?
एक तरफ तो ये है कि अमेरिका अगर पीछे हटा, तो बांग्लादेश को भारत की तरफ देखना ही पड़ेगा। पर यहाँ एक पेंच भी है – क्या बांग्लादेश वाकई अपनी anti-India policies से पीछे हटेगा? मेरा मानना है relations improve हो सकते हैं, लेकिन साथ ही कुछ नई टेंशन्स भी पैदा हो सकती हैं। जैसे कि…
3. क्या भारत को मिलेगा फायदा? सच्चाई जान लो
ईमानदारी से कहूँ तो… हाँ, मिल सकता है! ट्रंप तो पहले से ही भारत को China के खिलाफ एक मजबूत साथी के तौर पर देखते हैं। अब अगर बांग्लादेश को अमेरिकी सपोर्ट कम मिला, तो इस region में भारत की importance बढ़ना तय है। पर सवाल ये है कि क्या हम इस मौके का फायदा उठा पाएंगे?
4. बांग्लादेश के पास क्या हैं विकल्प? असली सलाह
अब बात करते हैं समाधान की। बांग्लादेश को दो चीजें तुरंत करनी होंगी – पहला, अपने घर का ठीक करो (यानी human rights और democracy के मामले)। दूसरा, नए दोस्त बनाओ! China के साथ relations बढ़ाकर वो अमेरिका पर अपनी dependence कम कर सकते हैं। पर याद रहे… ये कोई आसान रास्ता नहीं है। एकदम ज़बरदस्त चुनौती। सच में।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

