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Zohran Mamdani का कॉलेज एप्लीकेशन विवाद: विशेषाधिकार प्राप्त बच्चों का ‘पीड़ित’ होने का नाटक!

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ज़ोहरान ममदानी का कॉलेज एप्लीकेशन स्कैंडल: अमीर बच्चों का ‘गरीब’ बनने का ड्रामा!

अरे भाई, न्यूयॉर्क के इस प्रगतिशील नेता ने तो इस बार पूरा तमाशा कर दिया! ज़ोहरान ममदानी फिर सुर्खियों में हैं, और वजह है उनके बेटे का वो कॉलेज एप्लीकेशन जिसमें सच्चाई से खेल हुआ है। सोचिए, एक ऐसा लड़का जिसके पास हर सुविधा है, वो खुद को ‘गरीब’ और ‘अल्पसंख्यक’ बता रहा है? ये वही हाल है जैसे कोई अमीर आदमी सरकारी राशन की लाइन में लग जाए। और सबसे मजेदार बात? ये वही लोग हैं जो social justice की रट लगाए रहते हैं। क्या कहेंगे अब?

कहानी क्या है? VIP बच्चे vs असली वंचित

देखिए, ममदानी साहब खुद तो बड़े नेता हैं, बड़े घराने से हैं, लेकिन हमेशा गरीबों की बात करते नजर आते हैं। पर अब उनके बेटे ने कॉलेज फॉर्म में क्या लिखा? कि वो ‘वंचित’ परिवार से है! अरे भई, ये कैसी वंचिता? जबकि असलियत ये है कि ये परिवार तो न्यूयॉर्क के क्रीमी लेयर में आता है। ईमानदारी से कहूं तो, ये hypocrisy की पराकाष्ठा है। वो खुद जिस चीज के खिलाफ लड़ने का दावा करते हैं, वही कर रहे हैं। क्या आपको नहीं लगता कि ये दोहरा मापदंड है?

क्या-क्या सामने आया? फर्जी दावे से लेकर मीडिया की जांच तक

अब जरा इसके details देखिए:
– पहला तो, एप्लीकेशन में income और background के बारे में जो लिखा गया, वो पूरा झूठ निकला
– दूसरा, media की जांच से पता चला कि ये कोई छोटी-मोटी गलती नहीं, बल्कि प्लान्ड था
– तीसरा, college ने तो अब पूछताछ शुरू कर दी है और strict action की बात कर रहा है

एकदम धमाल है। सच में।

किसने क्या कहा? राजनीति से लेकर एक्टिविस्ट्स तक

इस मामले ने तो पूरे न्यूयॉर्क को हिला दिया है। ममदानी के opponents तो मानो मौका पाकर टूट पड़े हैं। उनका कहना है – “देखो इन liberal elites को, बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं पर असलियत क्या है?” वहीं social activists का कहना है कि ऐसे cases असल में जिन्हें सही मदद चाहिए, उनके chances खराब करते हैं। और ममदानी जी? चुप्पी साधे बैठे हैं। उनके supporters का कहना है कि शायद कोई ‘technical mistake’ हो गई होगी। हां जी, बिल्कुल!

आगे क्या होगा? एडमिशन से लेकर राजनीति तक

अब सवाल यह है कि इसका असर क्या होगा? अगर college की जांच में ये साबित हो गया कि गलत जानकारी दी गई थी, तो बेचारे लड़के का admission तो गया। राजनीति में? ममदानी की image को तो बट्टा लगेगा ही, खासकर उन voters में जो सच्चाई पसंद करते हैं। पर असल मुद्दा ये है कि ये केस दिखाता है कि कैसे पैसे वाले लोग system को अपने फायदे के लिए manipulate करते हैं। और ये कोई नई बात नहीं, बस इस बार पकड़े गए।

आखिर में, ये सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है। ये तो उस पूरी सोच का नमूना है जहां बातें और काम में जमीन-आसमान का फर्क होता है। जब तक ऐसे double standards पर सवाल नहीं उठेंगे, तब तक social justice की बातें सिर्फ दिखावा ही रहेंगी। क्या आपको नहीं लगता?

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Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com

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